आटिज्म Autism हिंदी (आओ मिल कर अब आटिज्म को हराएं )

आटिज्म (मानसिक और शारीरिक रूप से अपंग बच्चे )

आटिज्म पिछले कुछ दशकों से एक गंभीर समस्या बनी हुई है। अमरीका में यह अनुपात 1965 से पहले 10 हजार बच्चों में से एक बच्चा था जो 2017 तक पहुंचते-पहुंचते 40 बच्चों के पीछे एक हो गया है जो की एक बहुत ही गंभीर सोचने का विषय है की आखिर ऐसा क्या हो गया है या मेडिकल साइंस ने कहाँ गलती है की आटिज्म बहुत तेजी से बच्चो में बढ़ रहा है |

 

भारत में यह आकड़ा अमेरिका से भी आगे है हम अपने आस पास कोई एक ऐसा बच्चा जरुर देखते होंगे जो मानसिक या शारीरिक तोर पर विकलांग है |
मां-बाप को यही बताया जाता है कि यह जिनैटिक डिफैक्ट है, जिसके कारण यह जिंदगी भर इसी बिमारी से पीडित रहेंगे। इन बच्चों को कुछ खास तरह की ट्रेनिंग देकर थोड़ा बहुत अपने लायक बनाया जा सकता है, जबकि इनकी मुख्य बीमारी ऐसे ही रहेगी । कहने का मतलब साफ़ है की इनको सही नहीं किया जा सकता है |

 

आटिज्म के कारण :-

मोर्डेन मेडिकल साइंस आटिज्म या किसी भी तरह के रोग जो जन्म से ही बच्चे में मोजूद हो उसका कारण जेनेटिक्स डिफेक्ट ही बताती है जबकि कई बच्चे ऐसे हैं जो जन्म से बिलकुल ठीक थे लेकिन जन्म के कुछ महीनो या साल के बाद जा कर आटिज्म का शिकार हो गए जिसका मेडिकल साइंस के पास कोई भी जवाब नहीं है |

 

होमियोपैथी उपचार से हमे देखा है कि जो बच्चे बोल नहीं सकते थे वो बोलने लग गए। कुछ अपनी सामान्य जिंदगी में आने लगे, आम बच्चों की तरह खेलने-कूदने लगे। कुछ सामान्य बच्चों के स्कूलों में जाने लगे। अगर इन बच्चों में आए सुधारों को देखे तो हमें मैडीकल साइंस की दी गई परिभाषा को फिर से जांचना होगा।

 

ऐसे में क्या करें |

इसमें 2 प्रकार की सम्भावना और उपचार है |

  • जन्म से ही आटिज्म का विकार
  • जन्म के बाद आटिज्म का शिकार

 

1-जन्म से ही आटिज्म का विकार

अगर बच्चा जन्म से ही आटिज्म का शिकार है तो होमियोपैथी उपचार के अंतर्गत हम माता के गर्भकाल से जुड़ी सारी ही मानसिक और शारीरिक समस्याओं को जानकार यह पता लगाने की कोशिश करते हैं की बच्चे के रोग का क्या कारण है उदाहरण दे कर समझाना आसान रहेगा |

मान लीजिये कोई बच्चा जन्म से सुन नहीं सकता है तो माता को गर्भ-काल में 3 हफ्ते से 10 हफ्तों के बीच कोई ना कोई छोटी या बड़ी मानसिक या शरीरिक परेशानी का सामना करना पडा होगा जिसके कारण बच्चा जन्म से सुन नहीं सकता, और यही कारण है की जब वो सुन नहीं सकता तो बोल भी नहीं सकता| एम्ब्रियोलोजी के अनुसार 3 हफ्ते से 10 हफ्तों के बीच गर्भ में बच्चे के कानो का विकास होता है |

नोट- ये थ्योरी मोर्डेन मेडिसिन नहीं मानती है जबकि हिस्ट्री लेने पर ये थ्योरी बिलकुल शत प्रतिशत सही साबित होती है, और उसके अनुसार चुनी गई होमियोपैथी मेडिसिन से चमत्कार हुआ है जन्म से अंधे बच्चे देखने लगे और बहरे बच्चे सुनने लगे, जैसा की मैंने पहले ही कहा है की आखिर मोर्डेन मेडिसिन से कहाँ गलती हुई है जो आटिज्म के रोगियों की संख्या बढती ही जा रही है|

2-जन्म के बाद आटिज्म का शिकार –

कई बच्चे ऐसे हैं जो जन्म से बिलकुल ठीक होते हैं लेकिन जन्म के बाद आटिज्म का शिकार हो जाते हैं और मेडिकल साइंस भी इस बात का पता नहीं लगा पाई है की ऐसा क्यूँ होता है सभी डॉक्टर अपने अपने हिसाब से माता पिता को समझाने की कोशिश करते हैं, हमने अपने अनुभव से पाया है की गलत दवा के प्रयोग से बच्चा आटिज्म का शिकार हो सकता है | जरुरी नहीं ऐसा हर बच्चे के साथ हो, क्यूंकि सभी की अपनी अपनी विशेषता  होती है अपना अपना डिफेंस होता है | इसमें भी माता की हिस्ट्री के साथ बच्चे की हिस्ट्री ली जाती है और रोग का मुख्य कारण ढूंढ कर दवा दी जाती है जिससे बच्चे में 3 से 6 महीने में ही काफी सुधार हो जाता है |

अगर आप आटिज्म का उपचार कराना चाहते हैं तो क्लिनिक पर विजिट कीजिये, या वेबसाइट पर दिए नंबर्स पर कॉल करें |

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