केस स्टडी / पेशेंट स्टडी क्या है ?

होमियोपैथी मेडिसिन का चुनाव रोगी के दिए गए लक्षणों के आधार पर किया ही जाता है | अगर रोगी के लिए सही दवा का चुनाव करना है तो रोगी के सारे ही लक्षण लेने होंगे |

किस तरह के लक्षण लिए जाते है ?

मुख्य रोग के लक्षण -

  • कब से रोग है ?
  • आराम कैसे होता है ?
  • कैसे बढता है ?
  • किस मोसम में बढता है ? आदि अनेक लक्षण |

रोगी के रोगों की हिस्ट्री (इतिहास)

  • बचपन से ले कर आज तक के सभी रोग
  • इस सेक्शन से ये पता लगाने की कोशिश की जाती है की रोग का कारण क्या है या कोई रोग गलत दवा के प्रयोग से दबाया तो नहीं गया |
  • इस सेक्शन से हमे ये भी पता लग जाता है की रोगी आने वाले समय में किस गंभीर रोग की तरफ बढ़ रहा है जिससे पहले ही उसको सचेत किया जा सके और मुख्य रोग को पूरी तरह से ख़त्म किया जा सके और रोगी को पूर्णतया स्वस्थ किया जा सके |

अब तक लिए गए उपचार की हिस्ट्री 

  • रोगी ने किसी किसी रोग के लिए क्या क्या उपचार लिया है ?
  • इस सेक्शन से यह पता लगाने में आसानी हो जाती है की जो मुख्य रोग है वो किसी दवा के गलत प्रयोग या साइड-इफ़ेक्ट से तो नहीं हुआ है ?

परिवार में चले आ रहे रोगों की लिस्ट 

  • इस सेक्शन में रोगी को अपने परिवार में चल रही रोगों को बताना होता है जिससे ये पता चल सके की कहीं रोग अनुवांशिक कारणों से तो नहीं हो रहा है |

शारीरिक लक्षण

  • भूख
  • प्यास
  • खाने में पसंद ना पसंद
  • यूरिन (पेशाब)
  • लेट्रिन
  • पसीना
  • मुह जा स्वाद
  • नींद
  • मुख्य लक्षणों की साइड (किस साइड रोग ज्यादा है )
  • विभिन्न मोसम का शरीर पर असर
  • धुल मिटटी धुएं आदि से होने वाला असर 

मानसिक लक्षण 

  • यह सेक्शन सबसे बड़ा होता है और इसमें सबसे अधिक समय लगता है ,
  • इस सेक्शन में रोगी की आदत, गुस्सा, रोना, सपने, डर आदि अनेक लक्षण लिए जाते हैं|
  • विभिन्न परिस्थितयों पर रोगी की प्रतिक्रिया के बारे में विस्तार से पूछा जाता है जिससे रोगी की दवा का चुनाव करने में आसानी हो जाती है |

बचपन में रोगी का स्वभाव 

  • इस सेक्शन से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है की किस किस परिस्थिति का असर रोगी पर हो सकता है जो मुख्य रोग से जुड़ें होने का कारण हो सकता है
  • यह सेक्शन लम्बे समय से चले आ रहे रोगों के लिए बहुत जरुरी होता है जिसकी डिटेल रोगी के माता पिता दे सकते हैं
  • इस सेक्शन से रोगी के वर्तमान और बचपन के स्वभाव की तुलना की जाती है जो मेडिसिन चयन में अहम् भूमिका निभाता है |

दवा का चुनाव 

  • सारे लक्षण लेने के बाद किन किन लक्षणों के आधार पर रोगी को मेडिसिन देनी है ये डॉक्टर पर निर्भर करता है,
  • एक कुशल डॉक्टर उन लक्षणों का चुनाव करता है जो रोगी को अन्य रोगियों से अलग करते हैं |

दवा की शक्ति का चुनाव 

  • दवा का चयन करने के बाद रोगी के शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर होमियोपैथी मेडिसिन की शक्ति (पोटेंसी ) का चुनाव किया जाता है |
इस सभी प्रोसेस को केस स्टडी / पेशेंट स्टडी कहते हैं अगर आप किसी भी पुराने रोग

जैसे

  • सोराइसिस
  • सफेद दाग- लियूकोडर्मा (leucoderma)
  • आटिज्म
  • दौर पड़ना
  • अस्थमा
  • गर्भ धारण ना कर सकना
  • निल स्पर्म या स्पर्म काउंट कम आदि सभी पुराने रोग

रोगों के लिए वेबसाइट पर दिए नंबर पर व्हाट्स-एप्प करें |

ऑनलाइन ट्रीटमेंट के लिए यहाँ संपर्क करें |

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