सेरिब्रल पैल्सि / Cerebral Palsy होमियोपैथी

जिस समय बच्चे का जन्म होता है उस समय एक माँ का भी जन्म होता है, इससे पहले वो माँ कभी नहीं थी, वो एक लड़की थी, एक पत्नी थी, एक बेटी थी लेकिन माँ का जन्म तब ही हुआ जब उसके बच्चे ने जन्म लिया | लेकिन उसकी माँ का बच्चा अगर जन्म से ही या जन्म के बाद किसी भयंकर रोग से पीड़ित हो जाता है तो एक माँ के लिए इससे ज्यादा दुःख की बात शायद ही कोई हो, साथ ही सही जानकारी और उपचार के आभाव में सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है |

 

सेरिब्रल पैल्सि/Cerebral Palsy

सेरिब्रल पैल्सि नामक डिजीज गतिविधि (movement) और हावभाव के नियंत्रण को प्रभावित करती हैं। इसका कारण ब्रेन में गर्भावस्था या जन्म के बाद हुई चोट (injury) हो सकता है । यह रोग बहुत कम या अत्यधिक गंभीर भी हो सकता है |

हमारा उपचार (होम्योपैथिक, एक्यूप्रेशर, फूड़ सुप्प्लिमेंट, नेचुरोपेथी और मसाज थेरपी) शुरू होने पर अधिकतर बच्चे अपनी क्षमताओं में 100% तक सुधार ला सकते हैं। सेरिब्रल पैल्सि बहुत तेजी से होने वाला रोग नहीं है इसलिए इसका उपचार भी लंबा (6 महीने से 5 साल तक ) हो सकता है |

सेरिब्रल पैल्सि वाले बहुत से बच्चे दूसरी ऐसी समस्याओं से ग्रस्त होते हैं जिनके उपचार की साथ में आवश्यकता होती है। इनमें मानसिक सामान्य विकास में कमी; सीखने की अक्षमता; दौरा; और देखने, सुनने और बोलने की समस्या शामिल है।

प्राय: देखा यह गया है कि सेरिब्रल पैल्सि का सही से ट्रीटमेंट तब तक नहीं हो पाता जब तक कि बच्चा दो से तीन वर्ष की उम्र का नहीं हो जाता।

सेरिब्रल पैल्सि के तीन मुख्य प्रकार :

स्पास्टिक सेरिब्रल पैल्सि  प्रभावित लोगों में से लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोग स्पास्टिक सेरिब्रल पैल्सि से ग्रस्त होते हैं, जिसमें कि मांसपेशियां सख्त होती हैं जो कि गतिविधि को मुश्किल बना देती हैं। जब दोनों टांगें प्रभावित होती हैं (स्पास्टिक डिप्लेजिआ), तो बच्चे को चलने में मुश्किल हो सकती है क्योंकि कूल्हे एवं टांगों की सख्त मांसपेशियां टांगों को अंदर की ओर मोड़ सकती हैं और घुटने पर क्रास कर सकती हैं (इसे सिजरिंग कहा जाता है)। अन्य मामलों में शरीर का केवल एक पक्ष प्रभावित होता है (स्पास्टिक हेमिप्लेजिआ), अक्सर बाहें टांगों के मुकाबले ज्यादा गहराई से प्रभावित होती हैं। सर्वाधिक गंभीर स्पास्टिक क्वाडरिपलेजिआ होती है, जिसमें कि अक्सर मुंह और जीभ को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों के साथ-साथ सभी चारों अंग और धड़ा प्रभावित होता है। स्पास्टिक क्वाडरिपलेजिआ वाले बच्चों में मंदबुद्धि और अन्य समस्याएं पायी जाती हैं।

डिसकाइनेटिक सेरिब्रल पैल्सि  लगभग 10 से 20 प्रतिशत में डिसकाइनेटिक रूप होता है जो कि समूचे शरीर को प्रभावित करता है। इसका पता मांसपेशी के टोन में उतार-चढ़ावों (बहुत सख्त से लेकर बहुत अधिक ढीले तक बदलता रहता है) से चलता है और कई बार यह अनियंत्रित गतिविधि से जुड़ा होता है (जो कि धीमी एवं मुड़ी हुई या त्वरित एवं झटकेदार हो सकती है)।

कायदे से बैठने एवं चलने के लिए अपने शरीर को नियंत्रित करने के लिए बच्चों को अक्सर सीखने में परेशानी होती है। क्योंकि चेहरे एवं जीभ की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं, इसके अलावा चूसने, निगलने और बोलने में भी मुश्किल आ सकती है।

एटाक्सिक सेरिब्रल पैल्सि  लगभग 5 से 10 प्रतिशत इसके एटाक्सिक रूप से ग्रस्त होते हैं, जो कि संतुलन एवं समन्वयन को प्रभावित करती है। वे अस्थिर चाल के साथ चल सकते हैं और उन्हें उन गतियों में मुश्किल आती है जिनके लिए सटीक समन्वयन की आवश्यकता होती है, जैसे कि लेखन।

गर्भावस्था के दौरान और जन्म के समय के आसपास ऐसी बहुत सी चीजें घटित होती हैं जो कि मस्तिष्क के सामान्य विकास को बाधित कर सकती हैं और जिनके परिणामस्वरूप सेरिब्रल पैल्सि हो सकती है। लगभग 70 प्रतिशत मामलों में मस्तिष्क को क्षति जन्म से पहले पहुंचती है, हालांकि यह प्रसव के समय के आसपास, या जीवन के पहले महीने या वर्ष में भी घटित होती है।

हमारे क्लिनिक में सेरिब्रल पैल्सि का उपचार किस प्रकार किया जाता है ?

हमारा क्लिनिक पहला ऐसा क्लिनिक है जो होमियोपैथी उपचार के साथ साथ एक्यूप्रेशर थेरपी , नेचुरोपैथी, फूड सप्लीमेंट और मसाज थेरेपी देता है | एक्यूप्रेशर थेरपी और मसाज थेरपी के लिए माता पिता को तैयार किया जाता है जिससे रोगी को घर पर ही लाभ मिल सके और रोगी जल्दी से जल्दी ठीक हो सके | होमियोपैथी उपचार के साथ साथ ये थेरपी देने से हमने पाया की रोगी को 100% लाभ मिलता है |

1-जन्म से ही सेरिब्रल पैल्सि

अगर बच्चा जन्म से ही सेरिब्रल पैल्सि का शिकार है तो होमियोपैथी उपचार के अंतर्गत हम माता के गर्भकाल से जुड़ी सारी ही मानसिक और शारीरिक समस्याओं को जानकार यह पता लगाने की कोशिश करते हैं की बच्चे के रोग का क्या कारण है उदाहरण दे कर समझाना आसान रहेगा |

मान लीजिये कोई बच्चा जन्म से सुन नहीं सकता है तो माता को गर्भ-काल में 3 हफ्ते से 10 हफ्तों के बीच कोई ना कोई छोटी या बड़ी मानसिक या शरीरिक परेशानी का सामना करना पडा होगा जिसके कारण बच्चा जन्म से सुन नहीं सकता, और यही कारण है की जब वो सुन नहीं सकता तो बोल भी नहीं सकता| एम्ब्रियोलोजी के अनुसार 3 हफ्ते से 10 हफ्तों के बीच गर्भ में बच्चे के कानो का विकास होता है |

नोट- ये थ्योरी मोर्डेन मेडिसिन नहीं मानती है जबकि हिस्ट्री लेने पर ये थ्योरी बिलकुल शत प्रतिशत सही साबित होती है, और उसके अनुसार चुनी गई होमियोपैथी मेडिसिन से चमत्कार हुआ है जन्म से अंधे बच्चे देखने लगे और बहरे बच्चे सुनने लगे |

2-जन्म के बाद सेरिब्रल पैल्सि –

कई बच्चे ऐसे हैं जो जन्म से बिलकुल ठीक होते हैं लेकिन जन्म के बाद सेरिब्रल पैल्सि का शिकार हो जाते हैं गलत दवा के प्रयोग से या दिमाग में चोट लगने पर बच्चा सेरिब्रल पैल्सि का शिकार हो सकता है | जरुरी नहीं ऐसा हर बच्चे के साथ हो, क्यूंकि सभी की अपनी अपनी विशेषता  होती है अपना अपना डिफेंस होता है | इसमें भी माता की हिस्ट्री के साथ बच्चे की हिस्ट्री ली जाती है और रोग का मुख्य कारण ढूंढ कर दवा दी जाती है जिससे बच्चे में 3 से 6 महीने में ही काफी सुधार हो जाता है |

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