पी.सी.ओ.डी (पी.सी.ओ.एस) अंडे दानी में गांठे

आजकल लड़कियों में बड़ी ही छोटी उम्र से पीसीओएस यानी की पोलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्‍या देखने को मिल रही है। चिंता की बात यह है कि कई सालों पहले यह बीमारी केवल 30 के ऊपर की महिलाओं में ही आम होती थी, लेकिन आज इसका उल्‍टा ही देखने को मिल रहा है। कुछ शादी शुदा महिलायें इसी कारण माँ नहीं बन पाती जिससे समाज में उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ता है लेकिन अगर होमियोपैथी उपचार लिया जाए तो ये कोई बड़ी समस्या नहीं है 3 से 6 महीने में ही गर्भ-धारण हो जाता है |

क्या है पी.सी.ओ.डी (पाली-सिस्टिक ओवेरियन डिजीज)

पीसीओडी तब होता है जब सेक्स हार्मोन में असंतुलन पैदा हो जाती है। हार्मोन में ज़रा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। इस कंडीशन की वजह से ओवरी में छोटी गांठे (Cyst) बन जाता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो न केवल ओवरी और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है बल्कि यह आगे चल कर कैंसर का रुप भी ले लेती है। दरअसल महिलाओं और पुरुषों दोनों के शरीरों में ही प्रजनन संबंधी हार्मोन बनते हैं। एंड्रोजेंस हार्मोन पुरुषों के शरीर में भी बनते हैं, लेकिन पीसीओएस की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के अंडाशय (Ovary) में हार्मोन सामान्य मात्रा से अधिक बनते हैं। यह स्थिति सचमुच में घातक साबित होती है। ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होते हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है। यह स्थिति पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम कहलाती है। और यही समस्या ऐसी बन जाती है, जिसकी वजह से महिलाएं गर्भ धारण नहीं कर पाती हैं।

लक्षण 

  • चेहरे पर बाल उग आना
  • मुंहासे होना
  • बाल झड़ना
  • पिगमेंटेशन (चेहरे पर दाग)
  • मोटापा
  • अनियमित रूप से माहवारी आना
  • यौन इच्छा में अचानक कमी आ जाना
  • गर्भधारण में मुश्किल होना
  • गर्भपात होना आदि ये कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन की ओर महिलाएं ध्यान नहीं देती हैं।

कारण-

1. खराब डाइट: जंक फूड, जैसे पीजा और बर्गर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। अत्यधिक तैलीय, मीठा व वसा युक्त भोजन न खाएं। मीठा भी सेहत के लिये खराब माना जाता है। इस बीमारी के पीछे डयबिटीज भी एक कारण हो सकता है। अपने खाने पीने में हरी-पत्‍तेदार सब्‍जियों को शामिल करें और जितना हो सके उतना फल खाएं।

2. मोटापा: मोटापा हर मर्ज में परेशानी का कारण बनता है। ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड का सेवन तेजी से वजन बढ़ाता है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में बढ़ोतरी होती है, जो ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसलिए वजन घटाने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। जो महिलाएं बीमारी होने के बावजूद अपना वजन घटा लेती हैं, उनकी ओवरीज में वापस अंडे बनना शुरू हो जाते हैं।

3. लाइफस्‍टाइल: इन दिनों ज्‍यादा काम के चक्‍कर में तनाव और चिंता अधिक रहती है। इस चक्‍कर में लड़कियां अपने खाने-पीने का बिल्‍कुल भी ध्‍यान नहीं देती। साथ ही लेट नाइट पार्टी में ड्रिंक और स्‍मोकिंग उनकी लाइफस्‍टाइल बन जाती है, जो बाद में बड़ा ही नुक्‍सान पहुंचाती है। इसलिये अपनी दिनचर्या को सही कीजिये और स्‍वस्‍थ्‍य रहिये। पीसीओएस को सही किया जा सकता है। अगर हार्मोन को संतुलित कर लिया जाए तो यह अपने आप ही ठीक हो जाएगा। आजकल की लड़कियों को खेल में भाग लेना चाहिये और खूब सारा व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा अपने खाने-पीने का भी अच्‍छे से ख्‍याल रखना चाहिय तभी यह ठीक हो सकेगा |

पी.सी.ओ.डी का होम्योपैथिक उपचार 

सबसे पहले ये जान लेना जरुरी है की होमियोपैथी में शारीरिक और मानसिक लक्षण जान कर ही उपचार किया जाता है , जिससे हार्मोन बैलेंस हो जाते है | होमियोपैथी एक सुरक्षित उपचार है जिसमे बिना साइड-इफेक्ट के रोगी को पूर्ण रूप से रोग से छुटकारा मिल जाता है |

अपना उपचार कराने के लिए आप हमारे व्हाट्स-एप्प नंबर पर संपर्क कर सकते हैं |

ये महिला पी.सी.ओ.डी के कारण माँ नहीं बन पा रही थी लेकिन हमारे ट्रीटमेंट से रोगी को 3 महीने के अन्दर ही माता बनने का सुख मिला |

 

 

 

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